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मई, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सूचना का समय

 आजकल सूचना भ्रामक होती जा रही है।भ्रामक करते हैं सूचना के साधन।अख़बार को ही ले लीजिए ,एक समय था जब हर सूचना तारीख के साथ छपती थी अब छपने वाली सूचना से तारीख गायब हो गयी।क्या ये महज एक गलती है।ये गलती नहीं है मैं मानता हूँ कि ये एक ऐसी योजना है जो धीरे धीरे लोगों के दिमाग में अख़बार की फोटो और कटिंग जो सोशल मीडिया पर पोस्ट होती हैं,उन पर अविश्वास करने का अभ्यास करवाया जा रहा है।लोग कहने लगे हैं कि कोई भी कभी की कटिंग पोस्ट कर लोगो को भ्रमित कर देते हैं ,इसलिए इन पर विश्वास न करें। सोशल मीडिया की तो बात ही निराली है।लोग दूसरों की पोस्ट को बिना जांचे परखे रिपोस्ट और फॉरवर्ड कर देतेहैं। लेकिन जब सूचना नहीं आयेगी तो लोग अंधरे में रहेंगे।जो पारदर्शिता शुरू हुई थी वही अब धीरे धीरे खत्म होने को है, क्योंकि जिन्हें पारदर्शिता लानी है वे ही भ्रम पैदा कर रहे हैं।प्रिंट मीडिया अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी को समझे और हर खबर के प्रारंभ में तारीख और राज्य का नाम अवश्य लिखें ताकि पाठकों को खबर पढ़ते समय कोई भ्रम न रहे ।आम नागरिक पत्रकारों की भी जिम्मेदारी है कि अख़बार या ओडियो ,वीडियो की कटिंग डा...

The greatest masterpiece

                         2. Greatest masterpiece - story                                 हिंदी अनुवाद (hindi translation)                 Chapter -   Greatest masterpiece                                        सबसे बड़ी कृति  एक बार एक आदमी था जिसके तीन बेटे थे और उसके पास उस घर के अलावा कोई और संपत्ति नहीं थी जिसमें वह रहता था। अब पिता अपने तीनों बेटों से बराबर प्यार करता था, इसलिए वह यह तय नहीं कर पा रहा था कि उसकी मृत्यु के बाद घर किसका होगा, क्योंकि वह किसी को दूसरों से ज़्यादा तरजीह नहीं देना चाहता था। और वह घर बेचना नहीं चाहता था, क्योंकि यह पीढ़ियों से उसके परिवार का था; अन्यथा, वह पैसे को उनके बीच बराबर बाँट सकता था। अंत में उसे एक विचार सूझा और उसने अपने बेटों से कहा, "तुम सभी क...